30 अक्टूबर 2026 की रात साढ़े ग्यारह बजे पार्टी के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय संगठन विभाग के प्रभारी और पोलित ब्यूरो सदस्य का. स्वदेश भट्टाचार्य ने पटना के रूबन मेमोरियल अस्पताल में अंतिम सांसें लीं. ऑक्सीजन लेबल और ब्लड प्रेशर के लगातार गिरते जाने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया था. वे पिछले करीब दो माह से वहां इलाज में थे.
31 अक्टूबर 2026 की सुबह 10 बजे उनके पार्थिव शरीर को पहले 213-काराकाट, न्यू एमएलए फ्लैट, वीरचंद पटेल पथ, पटना ले आया गया और फिर उन्हें लेकर आरा के लिए प्रस्थान किया गया. 31 अक्टूबर की दोपहर से 1 नवंबर सुबह 8 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को आरा के क्रांति पार्क में लोगों के दर्शनार्थ रखा गया. वहां उन्हें श्रद्धांजलि एवं अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग जुटे.
1 नवंबर की सुबह 9 बजे से बिहटा और नौबतपुर होते हुए उनको पुनः 213-काराकाट, न्यू एमएलए फ्लैट, वीरचंद पटेल पथ, लाया गया जहां अगले रोज 2 नवंबर की दोपहर को उनकी अंतिम यात्रा शुरू होने तक राजधानी पटना समेत राज्य व देश के अलग अलग हिस्सों से पार्टी नेता एवं कार्यकर्त्ता उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए आते रहे.
कई वाम व जनवादी दलों के वरिष्ठ नेताओं – सीपीएम के अरुण मिश्रा, सीपीआइ के रामलला सिंह, विजय नारायण मिश्र व जानकी पासवान, वीआईपी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता देव ज्योति, एसयूसीआइ (सी) के राज्य सचिव अरूण कुमार सिंह व नेता सूर्यकर जितेन्द्र, सीपीआइएमएल (कानू सान्याल) के अरविंद सिन्हा, सीपीआइएमएल (क्लास स्ट्रगल) के राज्य सचिव नंदकिशोर सिंह, राजद के महासचिव भाई वीरेन्द्र, कार्यालय सचिव चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह व पूर्व विधायक रामानुज तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं – मदन, कंचनबाला व महेन्द्र सुमन, वरिष्ठ पत्रकार प्रणव चौधरी, इंडियन इंजीनियर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्यामनंदन प्रसाद सिंह व पूर्व महासचिव प्रभु शंकर महाराज, प्रो. भारती एस. कुमार व प्रो. संतोष कुमार आदि ने उनको श्रद्धांजलि देते हुए शोक-पुस्तिका पर अपनी भावनाएं दर्ज कीं.
2 नवंबर को काॅमरेड स्वदेश भट्टाचार्य की अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले भाकपा(माले) महासचिव काॅमरेड दीपंकर भट्टाचार्य तथा देश के अन्य राज्यों से आये वरिष्ठ पार्टी नेताओं – रामजी राय, श्रीराम चौधरी, सुधाकर यादव, कृष्णा अधिकारी व ईश्वरी कुशवाहा (उत्तर प्रदेश), कार्तिक पाल, इंद्राणी दत्ता व जयतु देशमुख (प. बंगाल), प्रभात कुमार चौधरी व संजय शर्मा (दिल्ली), वी. शंकर (तमिलनाडु), बंगार राव (आंध्र प्रदेश), बलिन्द्र सैकिया व विवेक दास (असम), रवि फांग्चो (कार्बी), सुवेन्दु सेन, जनार्दन प्रसाद, मनोज भक्त, हलधर महतो, गीता मंडल व विनोद सिंह (झारखंड), तिरुपति गोमांगो (ओडिशा) व उदय भट्ट (महाराष्ट्र) तथा राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य अमर, पार्टी सांसदों – राजा राम सिंह व सुदामा प्रसाद, पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद, वरिष्ठ नेता केडी यादव (बिहार), अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव पुरुषोत्तम शर्मा, अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेंद्र झा, ऐक्टू के महासचिव राजीव डिमरी, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, अखिल भारतीय स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की महासचिव व विधान पार्षद शशि यादव, आरवाइए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा व महासचिव नीरज कुमार, जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह, दिल्ली की विश्वविद्यालय शिक्षक नेता उमा राग तथा बिहार, झारखंड व उत्तरप्रदेश के कई अन्य नेताओं ने माल्यार्पण कर उनको श्रद्धांजलि दी और बांसघाट तक की उनकी अंतिम यात्रा में शमिल हुए.
पार्टी महासचिव काॅमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने इस मौके पर कहा कि उनके संघर्षों एवं उनकी जीवन यात्रा को याद करते हुए कहा कि काॅमरेड स्वदेश भट्टाचार्य ने पिछले पांच दशकों से अपनी पूरी ऊर्जा पार्टी के निर्माण व विस्तार में लगा दिया. राजनीतिक व सांगठनिक उतार-चढ़ाव के बीच भी पार्टी की जो स्थिरता, धारावाहिकता व निरंतरता बनी रही, वे इस सबके प्रतीक थे और हम सबके अभिभावक थे. उनका निधन पार्टी के लिए शोक मात्र नहीं है, बल्कि उसी संकल्प को दोहराने और साकार करने के लिए पूरी मेहनत से काम करने की प्रेरणा देता है जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया था. जीवन के अंतिम दौर में भी सक्रियता कम नहीं हुई थी. वे देश में चल रहे तमाम आंदोलनों की जानकारी रखते थे, उन पर निरंतर बात करते थे और उनमें पार्टी का हस्तक्षेप कैसे हो – इसको लेकर चर्चा करते थे. आज जब देश एक नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लोकतंत्र खतरे में है, लोगों के संवैधानिक अधिकार खतरे में हैं, तब उनकी और उनके मार्गदर्शन की कमी खलेगी. हमें इनके बताए हुए रास्ते पर मजबूती के साथ आगे बढ़ना होगा. वे हमेशा हमारे अभिभावक बने रहेंगे.
दोपहर बाद उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई. सबसे आगे चल रहे वाहन से उनकी इस अंतिम यात्रा की लगातार उद्घोषणा की जा रही थी, उसके पीछे एक साथी पार्टी का झंडा झुकााए हुए चल रहे थे. उसके पीछे वाले वाहन पर था काॅ. स्वदेश भट्टाचार्य का पार्थिव शरीर. ‘काॅ. स्वदेश भट्टाचार्य को लाल सलाम!’ लिखे दो अलग-अलग बैनरों के पीछे पार्टी की महिला साथी और महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य और विभिन्न राज्यों से आए पार्टी के नेतागण और बिहार के विभिन्न जिलों तथा देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों लोग – पार्टी कार्यकर्ता व समर्थक महिला, पुरूष, छात्र व युवा – सभी मौन, सभी नतसिर, सभी शोकग्रस्त, सभी संकल्पबद्ध. सभी पैदल चलते हुए गंगा किनारे बांसघाट पहुंचे और वहां स्थित विद्युत शवदाह गृह में उनके पार्थिव शरीर को सौंपते हुए उनको अंतिम विदा दी गई.
इस बीच बिहार के बेतिया, दरभगा, बेगूसराय, सुपौल, मोतिहारी, अरवल व आरा समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों तथा दिल्ली, यूपी, झारखंड, असम व पुडुचेरी आदि राज्यों समेत पूरे देश भर में काॅ. स्वदेश भट्टाचार्य की श्रद्धांजलि सभाओं के आयोजन का सिलसिला चलता रहा.